भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर रहा है चीन: मुरली मनोहर जोशी
गुवाहाटी, नवंबर १०: भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने आगाह किया कि चीन-भारत सीमा के करीब परमाणु मिसाइल तैनात करके चीन भारत की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने सीमा क्षेत्र में मजबूत साजो-सामान नहीं जुटा पाने पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया।
जोशी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘चीन भारत के लिए चुनौती है। सीमा के दूसरी ओर चीन की तैयारियां भारत की सीमा में उसके विकास संबंधी प्रयासों के लिए चुनौती खड़ी करती हैं।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘चीन ने तीन ओर से भारत को घेर रखा है। उत्तरी सीमा पर चीनी वायु और थल सेना संसाधनों तथा परमाणु मिसाइल प्रक्षेपण तक करने की क्षमता से परिपूर्ण हैं।’’ उन्होंने कहा कि उत्तरी और उत्तर-पूर्वी ओर के हिस्से विशेष रूप से असुरक्षित हैं। पूर्वोत्तर में रक्षा कार्यक्रम व बुनियादी सुविधाएं आवश्यकतानुसार नहीं हैं।
जोशी ने कहा, ‘‘मैंने देखा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को रक्षा के नजरिये से जोड़ रहे राष्ट्रीय राजमार्ग अच्छे नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उत्तरी सीमा पर चीन ने सियाचीन के बड़े हिस्से को घेर रखा है। चीनी बल आते हैं और लद्दाख में और अब पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।’’ जोशी ने कहा कि उनकी सेना पीओके में आती हैं। यह उत्तरी सीमा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि केंद्र देश की सुरक्षा व हिफाजत के लिए मजबूत साजो-सामान नहीं मुहैया करा सका।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मैं सरकार से सीमाओं पर तैयारियों के स्तर के बारे में संसद के समक्ष जानकारी देने की मांग करता हूं। सरकार को जनता को सुनिश्चित करना चाहिए कि वह देश की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है।’’ भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘चीन ने श्रीलंका के दक्षिणी कोने में समुद्री बंदरगाह के लिए बड़ी धनराशि का निवेश किया है और इस तरह से हिंदी महासागर में मौजूदगी दर्ज कराई है।’’ जोशी ने कहा, ‘‘चीन ने हाल ही में वियतनाम के बंदरगाह पर भारतीय मौजूदगी का विरोध किया था और वे नहीं चाहते कि हम वहां तेल खोजने के काम में हिस्सा लें। उन्होंने भारतीय जहाजों को वहां पहुंचने से भी रोका है।
उन्होंने कहा कि देश को इन इलाकों में चीन की डिजाइनों के बारे में पहले के अनुभवों से सीख लेनी चाहिए। विकास और सुरक्षा के लिए कोई कोर.कसर नहीं छोड़नी चाहिए। जोशी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, असम और अन्य उत्तर.पूर्वी राज्यों में युद्धस्तर पर विकास कार्यों के लिए कदम उठाना जरूरी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या देश का रक्षा बजट सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त है तो उन्होंने कहा कि सरकार को पता लगाना चाहिए कि क्या यह एक अच्छी नौसेना, तटरक्षक, प्रभावशाली व सशस्त्र वायु सेना के लिए पर्याप्त है।
जोशी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘चीन भारत के लिए चुनौती है। सीमा के दूसरी ओर चीन की तैयारियां भारत की सीमा में उसके विकास संबंधी प्रयासों के लिए चुनौती खड़ी करती हैं।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘चीन ने तीन ओर से भारत को घेर रखा है। उत्तरी सीमा पर चीनी वायु और थल सेना संसाधनों तथा परमाणु मिसाइल प्रक्षेपण तक करने की क्षमता से परिपूर्ण हैं।’’ उन्होंने कहा कि उत्तरी और उत्तर-पूर्वी ओर के हिस्से विशेष रूप से असुरक्षित हैं। पूर्वोत्तर में रक्षा कार्यक्रम व बुनियादी सुविधाएं आवश्यकतानुसार नहीं हैं।
जोशी ने कहा, ‘‘मैंने देखा है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को रक्षा के नजरिये से जोड़ रहे राष्ट्रीय राजमार्ग अच्छे नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उत्तरी सीमा पर चीन ने सियाचीन के बड़े हिस्से को घेर रखा है। चीनी बल आते हैं और लद्दाख में और अब पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।’’ जोशी ने कहा कि उनकी सेना पीओके में आती हैं। यह उत्तरी सीमा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि केंद्र देश की सुरक्षा व हिफाजत के लिए मजबूत साजो-सामान नहीं मुहैया करा सका।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘मैं सरकार से सीमाओं पर तैयारियों के स्तर के बारे में संसद के समक्ष जानकारी देने की मांग करता हूं। सरकार को जनता को सुनिश्चित करना चाहिए कि वह देश की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठा रही है।’’ भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘चीन ने श्रीलंका के दक्षिणी कोने में समुद्री बंदरगाह के लिए बड़ी धनराशि का निवेश किया है और इस तरह से हिंदी महासागर में मौजूदगी दर्ज कराई है।’’ जोशी ने कहा, ‘‘चीन ने हाल ही में वियतनाम के बंदरगाह पर भारतीय मौजूदगी का विरोध किया था और वे नहीं चाहते कि हम वहां तेल खोजने के काम में हिस्सा लें। उन्होंने भारतीय जहाजों को वहां पहुंचने से भी रोका है।
उन्होंने कहा कि देश को इन इलाकों में चीन की डिजाइनों के बारे में पहले के अनुभवों से सीख लेनी चाहिए। विकास और सुरक्षा के लिए कोई कोर.कसर नहीं छोड़नी चाहिए। जोशी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, असम और अन्य उत्तर.पूर्वी राज्यों में युद्धस्तर पर विकास कार्यों के लिए कदम उठाना जरूरी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या देश का रक्षा बजट सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त है तो उन्होंने कहा कि सरकार को पता लगाना चाहिए कि क्या यह एक अच्छी नौसेना, तटरक्षक, प्रभावशाली व सशस्त्र वायु सेना के लिए पर्याप्त है।

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